Wednesday, August 10, 2011

सूख न जाना तुलसा जी

धूप कड़ी है सूख न जाना तुलसा जी
आंगन-आंगन को महकाना तुलसा जी
दीपक तो उपक्रम है मात्र निवेदन का
जब हम भटकें, राह दिखाना तुलसा जी
एक ही ख़ुशबू-रंगत के हैं सब बिरवे
मंदिर-मस्जिद को समझाना तुलसा जी
साधारण जल की बूंदों ने तुमसे ही
सीखा है अमृत हो जाना तुलसा जी
तुम जैसी ही शोहरत मुझको हासिल हो
घर-घर गूंजे मेरा तराना तुलसा जी